Monday, May 27, 2024

आखिर क्या होता है”इंकलाब जिंदाबाद” का मतलब क्या होता है और ये क्यों बोला जाता है ।

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इंकलाब जिंदाबाद भारत में इस्तेमाल किया जाने वाला एक नारा है, जिसका अर्थ है ‘क्रांति की जीत’। यह नारा भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों ने 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली असेंबली में ध्वनि बम फोड़ते समय लगाया था। यह नारा मशहूर शायर हसरत मोहानी ने एक महफिल में आजादी-ए-कामिल पर बात करते हुए दिया था. और इस नारे ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और विशेषकर अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ, भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद की गतिविधियों को प्रेरित किया। स्वतंत्रता आंदोलन के समय के भारतीय राजनीतिक उपन्यासों में, स्वतंत्रता-समर्थक भावना अक्सर इस नारे को उठाने वाले पात्रों की विशेषता होती है।

इस उक्ति का प्रारंभ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से हुआ, जब राजा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा उठाया था और उन्होंने इसे ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की ओर एक प्रेरणास्त्रोत बनाया था। इस उक्ति का मतलब था कि वे स्वतंत्रता की दिशा में आग्रहित हैं और उन्होंने भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम में जुटने की पुकार दी।

इसके बाद, “इंकलाब जिंदाबाद” का उपयोग अन्य भी सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में हुआ, जैसे कि भारतीय संगठन विचारमंथन के समय भी, जब गांधीजी ने इसे अपने भाषणों और संवादों में अक्सर उपयोग किया। यह उक्ति उनकी अपील थी कि लोगों को समाज में परिवर्तन की ओर आग्रहित करना चाहिए और उन्हें स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करना चाहिए।

“इंकलाब जिंदाबाद” का उपयोग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी होता रहा, जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की और गणराज्य की स्थापना की। इस समय भी, यह उक्ति उन लोगों के उत्साह को बढ़ाने के लिए उपयोग की गई, जिन्होंने नई भारतीय समाज की नींव रखी और उसे विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में आग्रहित किया।

इसके साथ ही, “इंकलाब जिंदाबाद” का उपयोग विभिन्न अन्य देशों में भी हुआ है, जहाँ विभिन्न प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन की ओर संकेत करने के लिए यह एक प्रेरणा स्रोत बन गया है।


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