Friday, June 14, 2024

उत्तराखंड में सीएम धामी की पुलिस का कारनामा! जमीन कब्जाने वालों पर मेहरबान,पीड़ित पक्ष पर अत्याचार, शिकायत करने पर शांतिभंग में चालान

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उत्तराखंड में धामी सरकार के भूमाफिया पर नकेल कसने के दावों के बीच भूमाफियाओं द्वारा जमीन कब्जाने के मामले बन्द होने का नाम नहीं ले रहे हैं। साथ ही जब इस काम में पुलिस का सहयोग मिल जाए तो भूमाफियाओं का हौसले और भी बुलन्द हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला नैनीताल जनपद के हल्द्वानी क्षेत्र से सामने आया है। यहां पर एक पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पुलिस की मिलीभगत से भाजपा नेता और भू माफिया जमीन पर लगातार कब्जा करने प्रयास कर रहा है।

अगर आप अपनी खून पसीने की कमाई से हल्द्वानी में घर बनाने के लिए प्लॉट लेना चाह रहे हो तो सावधान हो जाइए, क्योंकि हो सकता है आपके खरीदे हुए प्लॉट पर दबंगई से गुंडे कब्जा कर लें और जब आप क्षेत्र की ईमानदार पुलिस के पास जाएं तो वो आप पर ही झूठा केस बना डालें और आप जान बचाने के लिए खामोश हो जाएं। जी हां ये सच है! हमारे पास आए प्रमाण और तीन दिनों तक ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग करने पर हल्द्वानी में पुलिस और माफियाओं का गठजोड़ समझना काफी है। कुछ समय पहले हल्द्वानी में ही खनन माफियाओं और हिस्ट्रीशीटर का साथ देने और आम आदमी पर झूठा मुकदमा करने के लिए हाईकोर्ट ने नैनीताल पुलिस को लताड़ लगाई थी। लेकिन आज भी प्रदेश की धाकड़ धामी सरकार में ऐसे ही पुलिसकर्मियों की धाकड़ तूती बोल रही है और जनता को इसका भुगतान रंगदारी देकर या फिर झूठे केस लड़कर चुकाना पड़ रहा है।

नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में एक भाजपा नेता की दबंगई से एक परिवार इस कदर पीड़ित है कि वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। दरअसल मामला जमीन से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक भाजपा नेता उनके द्वारा खरीदी गई जमीन को कब्जाना चाहता है और आए दिन उन्हें धमकी देते रहता है। पीड़ित पक्ष के अनुसार उन्हें पुलिस का भी सहयोग मिल रहा है, जिसके चलते उक्त भाजपा नेता के हौंसले बुलंद हैं।

एक ओर उत्तराखंड पुलिस के ईमानदार अधिकारी अपनी जान जोखिम में डाल कर 24 घंटे ड्यूटी करते हुए जन मानस की सुरक्षा करते हैं वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे पुलिस कर्मचारी सत्ता के दलालों और रंगदारी लेने वाले गुंडो के दबाव में काम करते हुए पुलिस की ईमानदार छवि को बट्टा लगाते हैं। मामले के अनुसार रेखा बिष्ट ने एक साल पहले बृज मोहन कोहली से जमीन खरीदी थी। लेकिन जैसे ही रेखा बिष्ट और उनके परिवार ने जमीन पर कब्जा लेकर भूमि पूजन करना चाहा तो एक नए दावेदार सुशील कुमार अग्रवाल और बीजेपी नेता जिला पंचायत उपाध्यक्ष आनंद सिंह दरमवाल मय हथियार गुंडों के साथ पहुंच गए और जमीन को सुशील कुमार अग्रवाल की बताते हुए भूमि पूजन के कार्यक्रम को तहस-नहस कर डाला। रेखा बिष्ट और चंदर बिष्ट के विरोध करने पर मौके पर मजदूर को बेरहमी से पीटा, परिवार को भद्दी गालियां दी और जान से मारने की धमकी देते हुए जमीन पर कब्ज़ा छोड़ने को कहा गया। जिसके बाद रेखा बिष्ट ने ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी में गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। आंखिर जब सीएम पोर्टल पर शिकायत की गयी तब एसएसपी पंकज भट्ट के आदेश पर हल्द्वानी कोतवाली में 31 जुलाई 2023 को धारा 147, 427, 506, 504 में जिला पंचायत उपाध्यक्ष आनंद सिंह दरमवाल और अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज़ की गयी। रेखा बिष्ट के अनुसार कई बार पुलिस में शिकायत करने पर भी उनकी शिकायत नहीं लिखी गयी, क्योंकि संबन्धित थाने के उप निरीक्षक पंकज जोशी  बीजेपी नेता आनंद सिंह दरमवाल के दबाव में काम करते हैं। इसलिए रेखा बिष्ट ने पंकज जोशी को जांच अधिकारी बनाए जाने पर आपत्ति की थी लेकिन पंकज जोशी ने एक दिन में ही बयान करवाकर फ़ाइनल रिपोर्ट लगा दी और धारा 182 में उल्टे रेखा बिष्ट पर मुकदमा दर्ज़ कर दिया।

इधर सुशील कुमार कोहली ने रेखा बिष्ट का दाखिल खारिज रुकवाने के लिए तहसील में शिकायत की, जिस पर तहसीलदार ने जांच की और शिकायत को गलत पाया। और 30 मार्च 2024 को रेखा बिष्ट के पक्ष में दाखिल खारिज करने के आदेश जारी कर दिये। जबकि जांच अधिकारी पंकज बिष्ट की फ़ाइनल रिपोर्ट तहसीलदार की जांच रिपोर्ट और आदेश के बिलकुल विपरीत है। जिसके बाद सुशील कुमार अग्रवाल और बीजेपी नेता आनंद सिंह दरमवाल गुंडागर्दी के बल पर प्लॉट खाली करवाने के लिए रेखा बिष्ट और उनके परिवार पर दबाव बनाने लगे। जिसके बाद रेखा बिष्ट ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने 25 अप्रैल 2024 को रेखा बिष्ट के प्लॉट में अन्य के द्वारा इंटरफेयर न करने के लिए आदेश जारी कर दिये। लेकिन आनंद सिंह दरमवाल नहीं रुके। कभी प्लॉट से सीसीटीवी तोड़ दिये, तो कभी बिजली के मीटर चोरी करवा दिये और जब रेखा बिष्ट ने इसकी शिकायत पुलिस में की तो उनकी शिकायत लिखी ही नहीं गयी, लेकिन उसी पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बावजूद रेखा बिष्ट, चंदर बिष्ट और बृज मोहन कोहली पर धारा 420 का मुकदमा दर्ज़ कर दिया।

इस मामले में दूसरा पक्ष जानने जब हमारे संवाददाता हल्द्वानी पहुंचे और बीजेपी नेता आनंद सिंह दरमवाल से संपर्क किया तो वो तीन दिनों तक रोज मिलने का समय देकर टहलाते रहे और अंत में इस मामले में बोलने से इंकार कर दिया। इसी तरह सुशील कुमार अग्रवाल ने आनंद सिंह दरमवाल को बड़ा भाई कहते हुए गेंद उन्हीं के पाले में डाल दी और पल्ला झाड लिया। आनंद सिंह दरमवाल जो कि बीजेपी नेता और वर्तमान में जिला पंचायत उपाध्यक्ष हैं और इन पर कई बार जमीन कब्जाने और रंगदारी वसूलने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। हमारी तफतीश में पता चला कि जो जमीन रेखा बिष्ट के नाम दर्ज़ हो चुकी है और जिसे  सुशील कुमार अग्रवाल और बीजेपी नेता आनंद सिंह दरमवाल अपना बता रहे हैं दरअसल वो जमीन केवल कागजों तक ही सीमित है। फर्जीवाड़े की ऐसी गुत्थी जिसे पुलिस खोलना ही नहीं चाहती। अगर थोड़ा सा भी हल्द्वानी पुलिस के जांच अधिकारी ने निष्पक्ष तौर पर केस को देखा होता तो कहानी यहां तक नहीं पहुँचती। सुशील कुमार अग्रवाल ने दाखिल खारिज रोकने के लिए पाँच बिन्दुओं का शिकायती पत्र तहसीलदार को दिया था जिस पर तहसीलदार ने विस्तार से प्रत्येक बिन्दुओं को जांचा और परखा, जिसके बाद निर्णय रेखा बिष्ट के पक्ष में देते हुए दाखिल ख़ारिज करने  के आदेश जारी कर दिये।

हम इससे दो कदम और पहले की बात करते हैं जिससे पता लगता है कि दुर्गा देवी और उनके बेटे गजेंद्र सिंह दरमवाल के द्वारा जमीन को लेकर सालों से फर्जीवाड़े किए जा रहे हैं और इसी फर्जीवाड़े के शिकार बृज मोहन कोहली बने, जिसके बाद सुशील कुमार अग्रवाल और रेखा बिष्ट भी इसी फर्जीवाड़े के पीढ़ित हैं। दुर्गा देवी और इनके बेटे गजेंद्र सिंह के फर्जीवाड़े के चलते कुछ इनकी प्रॉपर्टी यूनियन बैंक ने नीलाम कर बेच दी है और कुछ प्लॉट पर कई रजिस्ट्रियां की गयी है जिसके चलते गजेंद्र सिंह दरमवाल फिलहाल फरार चल रहे है।

ध्यान से समझिएगा कि मामला क्या है? 06 नवंबर 2017 को दुर्गा देवी अपने बेटे गजेन्द्र सिंह को 0.126 हेक्टेयर की पावर ऑफ अटॉर्नी देती है इसी पावर ऑफ अटॉर्नी से ठीक एक दिन बाद 07 नवंबर 2017 को गजेंद्र सिंह के द्वारा अनुराग सिंह को 0.102 हेक्टेयर जमीन बेच दी जाती है और दाखिल ख़ारिज भी करवा दिया जाता है।  जिसके बाद पावर ऑफ अटॉर्नी में केवल 0.024 हेक्टेयर जमीन शेष बचती है लेकिन गजेंद्र सिंह तथ्यों को छुपाकर इसी पावर ऑफ अटॉर्नी से 18 मई 2018 को 0.104 हेक्टेयर जमीन बृज मोहन कोहली को बेच देते हैं। गजेंद्र सिंह के द्वारा खाते में उपलब्ध जमीन से 0.08 हेक्टेयर जमीन ज्यादा बेच दी जाती है और तहसील स्तर के कर्मचारियों की मिली भगत से दाखिल ख़ारिज भी करवा दिया जाता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब खाते में जमीन ही नहीं थी तो इसका दाखिल ख़ारिज कैसे हुआ क्योंकि जब भी दाखिल ख़ारिज की प्रक्रिया होती है तो सभी दस्तावेज़ लगाए जाते हैं। और फिर यही जमीन 03 मई 2022 को बृज मोहन कोहली सुशील कुमार अग्रवाल को बेच देते हैं। यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि इसका भी दाखिल ख़ारिज कर दिया जाता है।

बृज मोहन कोहली ने इसके अलावा दरमवाल परिवार से दो रजिस्ट्री और करवाई थी जिसमें एक रजिस्ट्री दुर्गा देवी के दूसरे बेटे हिमांशु सिंह ने अपने खाते से जो कि उसे अपने भाई भवान सिंह और गजेंद्र सिंह से वर्ष 2015 में दान में मिली थी। इसी जमीन में से हिमांशु सिंह 17 मई 2018 को 0.126 हेक्टेयर बृज मोहन कोहली को बेच देते है। इस रजिस्ट्री में से 0.014 हेक्टेयर जमीन रास्ते में समायोजित कर दी जाती है जिस वजह से बृज मोहन कोहली के नाम केवल 0.112 हेक्टेयर का ही दाखिल ख़ारिज होता है। 02 मई 2023 में  बृज मोहन कोहली इसी जमीन को रेखा बिष्ट को बेच देते हैं। यह जमीन रजिस्ट्री में अंकित चौहद्दी और कोर्डिनेट्स के आधार पर मौके पर मौजूद है।

इस कहानी में फर्जीवाड़े की शुरुआत गजेन्द्र सिंह करते हैं जो खाते में उपलब्ध जमीन से कई गुना ज्यादा जमीन बृज मोहन कोहली को बेच देते हैं और दाखिल ख़ारिज भी करवा देते हैं बृज मोहन कोहली जिन्होनें अपनी मेहनत की कमाई से जमीन खरीदी उन्हें आज तक इस बात का पता नहीं है कि जो जमीन उन्हे दी गयी वो मौके पर है ही नहीं, क्योंकि बृज मोहन कोहली ने अन्य दो और जमीन के सौदे इन्हीं दरमवाल परिवार से किए थे जिसमें एक प्लॉट रेखा बिष्ट को बेचा गया और दूसरा सुशील कुमार अग्रवाल को। जिस पर वर्तमान में सुशील कुमार अग्रवाल क़ाबिज़ हैं। चंदर सिंह बिष्ट के अनुसार आज भी मामला न्यायालय में होने के बावजूद बीजेपी नेता आनंद सिंह दरमवाल उनके प्लॉट में आए दिन नुकसान करते हुए आ रहे हैं ताकि हम लोग यहां से चले जाये और ये उस प्लॉट पर अपना कब्ज़ा कर सके। इस मामले में चंदर सिंह बिष्ट कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत से खुद मिलकर शिकायत कर चुके हैं लेकिन अपने ऑन द स्पॉट फैसले को लेकर चर्चा में बने रहने वाले आईएएस दीपक रावत भी इस मामले में खामोश हैं।

बहरहाल हल्द्वानी जो एक शांत शहर के तौर पर जाना जाता है यहाँ रंगदारी, अवैध कब्ज़ा और गुंडागर्दी के कारण कई लोग परेशान हैं जिन लोगों से रंगदारी ली गयी है उनके मन में गुंडो का भय इस कदर बैठा हुआ है कि वो मीडिया के सामने आने से कतरा रहे हैं, लेकिन कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कई गंभीर खुलासे किए हैं और उनके सबूत भी दिये हैं। प्रदेश की धामी सरकार जो कि गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार को लेकर ज़ीरो टोलरेंस की बात करती है वहीं इनके द्वारा पोषित जनप्रतिनिधि और छुटभैय्ये नेता सत्ता की हनक में कुछ भी कर गुजरने से परहेज नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि अगर इस तरह के अराजक तत्व बीजेपी में शामिल हो तो जनता की रक्षक मित्र पुलिस इनकी रक्षक बन जाती है और असहाय रह जाती है और भोली भाली जनता जिसकी आवाज़ हम बन जाते हैं।

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