बॉलीवुड अभिनेता प्रांजल शांडिल्य की अपील, सिनेमाघरों में जाकर देखें उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित फिल्म

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देवभूमि उत्तराखंड की प्रतिभाएं आज हर क्षेत्र में अपनी धाक जमा रही हैं। इसी कड़ी में ऊधम सिंह नगर जनपद के रुद्रपुर निवासी प्रांजल शांडिल्य ने मायानगरी मुंबई यानी बॉलीवुड में कदम रखकर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रांजल की पहली बॉलीवुड फिल्म 'जान अभी बाकी है' जल्द ही बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए तैयार है, जिसे लेकर उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

प्रांजल शांडिल्य इस फिल्म में मुख्य अभिनेता (लीड रोल) के रूप में नजर आएंगे। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी कहानी एक टूरिस्ट गाइड की लव स्टोरी पर आधारित है। फिल्म की शूटिंग के लिए उत्तराखंड के चार प्रमुख जनपदों के खूबसूरत स्थानों को चुना गया, जिनमें पिथौरागढ़ और मुनस्यारी की हसीन वादियां मुख्य आकर्षण हैं। प्रांजल का कहना है कि अक्सर फिल्मों की शूटिंग पहाड़ों में होती है, लेकिन उन्हें पर्दे पर किसी और देश या राज्य का बता दिया जाता है। उनकी इस फिल्म में उत्तराखंड की खूबसूरती, संस्कृति और पहचान को उसी वास्तविक रूप में पेश किया गया है। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले प्रांजल की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। उनके पिता प्रमोद दीक्षित सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं और माता डॉ. प्रतिमा दीक्षित एक प्रोफेसर रह चुकी हैं। अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय प्रांजल ने अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। उनके अनुसार, यह फिल्म पूरी तरह से पारिवारिक और साफ-सुथरी है, जिसे हर उम्र के लोग एक साथ बैठकर देख सकते हैं। फिल्म के माध्यम से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश और दुनिया तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है। प्रांजल शांडिल्य की इस उपलब्धि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी खुशी जाहिर करते हुए उनकी सराहना की है। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार वर्तमान में राज्य में फिल्म सिटी के निर्माण और स्थानीय फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में प्रांजल जैसे स्थानीय कलाकारों का उभरना राज्य के सांस्कृतिक और आर्थिक भविष्य के लिए एक शुभ संकेत माना जा रहा है। फिल्म की रिलीज से पहले प्रांजल ने समस्त उत्तराखंडवासियों से भावुक अपील की है कि वे बड़ी संख्या में सिनेमाघरों में जाकर इस फिल्म को देखें। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों का समर्थन न केवल एक कलाकार को ऊर्जा देता है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में भी मदद करता है।