मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आदेश: आपातकालीन केंद्र से होगी राज्य की राशन और रसद व्यवस्था की दैनिक समीक्षा

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देहरादून। मध्य-पूर्व में चल रहे ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच संभावित वैश्विक प्रभावों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में अधिकारियों और विशेषज्ञों की तैनाती अग्रिम आदेशों तक के लिए कर दी गई है।

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और आपूर्ति प्रणाली पर लगातार नजर बनाए रखना है। इसके साथ ही खाद्य एवं रसद से जुड़ी सूचनाओं का नियमित संकलन, विश्लेषण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार द्वारा तय रोस्टर के अनुसार तैनात अधिकारी और विशेषज्ञ राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। वे प्रतिदिन प्रदेश में खाद्य एवं रसद की स्थिति की समीक्षा करेंगे और आवश्यक सूचनाओं का संकलन कर उनका विश्लेषण करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जरूरी कदम उठाएंगे, ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार आम जनता को आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि फिलहाल प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और लोगों को किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण यदि आपूर्ति श्रृंखला पर किसी तरह का असर पड़ता है तो इस निगरानी व्यवस्था के जरिए समय रहते स्थिति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। राज्य सरकार की इस पहल से प्रदेश में खाद्य एवं रसद आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और किसी भी संभावित आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटने में प्रशासन को सहूलियत मिलेगी।