धामी सरकार का मिशन कॉरिडोर: हरिद्वार-ऋषिकेश और शारदा रिवरफ्रंट के लिए डेडलाइन तय, 6 महीने में दिखेगी धरातल पर प्रगति

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे और निवेश को नई दिशा देने के लिए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड निवेश और आधारभूत संरचना विकास बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने 'हरिद्वार गंगा', 'ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर' और 'शारदा रिवरफ्रंट' जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा (डेडलाइन) तत्काल तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी के गठन का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना और इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि फाइलों की दौड़ के बजाय अब धरातल पर काम दिखना चाहिए। सीएम ने निर्देश दिए कि आगामी छह माह के भीतर इन परियोजनाओं के तहत कार्यों की वास्तविक प्रगति नजर आनी चाहिए। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ काम करें। बैठक में शारदा कॉरिडोर योजना पर विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टनकपुर क्षेत्र में शारदा नदी के किनारे रिवरफ्रंट विकास और घाटों के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। चूंकि यह क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील है, इसलिए उन्होंने भूगर्भीय अध्ययन और सुरक्षात्मक उपायों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस कॉरिडोर से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। आगामी हरिद्वार कुंभ को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा की स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश और हरिद्वार के घाटों का सौंदर्यीकरण और वहां आधारभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण प्राथमिकता पर रखा जाए। सीएम ने कहा कि इन कॉरिडोर का अंतिम उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना और धार्मिक पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना है। बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित शासन के सभी प्रमुख सचिव और सचिव मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रोजेक्ट्स में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताओं को दूर करें ताकि कोई भी योजना बजट या कागजी कार्रवाई की वजह से न रुके।