उत्तराखंड बिजली अपडेट: स्टील फर्नेश उद्योगों पर तीन घंटे की कटौती की मार, उत्पादन हो रहा प्रभावित

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देहरादून। उत्तराखंड में सूरज के तेवर तल्ख होते ही बिजली का संकट गहराने लगा है। बढ़ते तापमान के साथ बिजली की मांग ने रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है, जिसके चलते ऊर्जा निगम को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और उद्योगों में बिजली कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है। नदियों में पानी की कमी और उत्पादन में गिरावट ने इस संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अप्रैल के महीने में ही बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है। 1 अप्रैल को राज्य में बिजली की मांग 4.1 करोड़ यूनिट थी, जो 15 अप्रैल तक बढ़कर 4.3 करोड़ और सोमवार को 4.4 करोड़ यूनिट के पार पहुँच गई। इसके विपरीत, बिजली की उपलब्धता में भारी कमी दर्ज की गई है। यूपीसीएल को रोजाना करीब 80 हजार से 1 लाख यूनिट बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। राज्य की अपनी जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन फिलहाल न्यूनतम स्तर पर है। सामान्य दिनों में जहाँ यूजेवीएनएल का उत्पादन 2.4 करोड़ यूनिट तक रहता है, वहीं रविवार को यह सिमटकर महज 79 लाख यूनिट रह गया। केंद्रीय पूल से भी राज्य को रोजाना केवल 1.4 करोड़ यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। नदियों में जल स्तर कम होना बिजली उत्पादन में इस गिरावट की मुख्य वजह मानी जा रही है। उत्पादन में सुधार के लिए अब सबकी निगाहें उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर टिकी हैं। यूजेवीएनएल प्रबंधन को उम्मीद है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ पिघलना शुरू होगी। इससे नदियों का जल स्तर बढ़ेगा और राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन फिर से गति पकड़ेगा। बिजली कटौती का सबसे बड़ा असर स्टील फर्नेश इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। 3 घंटे की दैनिक कटौती से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे उद्यमियों में चिंता है। जानकारों का कहना है कि यदि जल्द ही उत्पादन नहीं बढ़ा या अतिरिक्त बिजली की खरीद नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह संकट शहरी क्षेत्रों तक भी पहुँच सकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उपभोक्ताओं से भी बिजली की बचत करने की अपील की जा रही है, ताकि ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।