Tuesday, February 7, 2023
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उत्तराखण्ड:- अपने ही टिकट के फेर में फंस गए कांग्रेस के दिग्गज ,करना पड़ रहा है इंतजार

देहरादून। विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने पहली सूची में 53 उम्मीदवारों की घोषणा तो कर दी है,लेकिन शेष 17 सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस असमंजस की स्थिति में है। यहां तक कि कांग्रेस के चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत की सीट भी पार्टी अभी तक तय नहीं कर पाई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत लगातार चाह रहे थे कि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव में उतारे,परन्तु पार्टी ने ऐसा नही किया।हालांकि पार्टी ने उन्हें चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाकर एक तरह से उनका चेहरा जरूर आगे किया है।सम्भावना है कि यह हरीश रावत का आखिरी चुनाव हो इसलिए हरीश रावत चाहते हैं कि वे एक बार और प्रदेश का नेतृत्व करें, लेकिन अभी तक वे खुद और उनकी पार्टी दोनों यह तय नहीं कर पाई है कि वे कहां से चुनाव लड़ें।
बताया जा रहा है कि हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण और रामनगर में से किसी एक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन वे किस सीट से चुनाव लडेंगे, इस पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। अभी इन दोनों में से किसी सीट पर पार्टी ने उम्मीदवार घोषित नहीं किये हैं। रामनगर में उत्तराखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने पिछला चुनाव भी यहीं से लड़ा था, लेकिन वह चुनाव वे हार गए थे। रंजीत रावत पहले हरीश रावत के खासमखास माने जाते थे,लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों में छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि रणजीत रावत रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते हैं, वहीं हरीश रावत की पहली पसंद भी रामनगर सीट है। इसलिए इस सीट पर कांग्रेस पार्टी फैसला नहीं कर पा रही है।
हरीश रावत चाहते हैं कि रामनगर से वे चुनाव लड़ें और रणजीत रावत को सल्ट भेजा जाए। रणजीत रावत सल्ट से चुनाव लड़ चुके हैं, उस सीट का उन्होंने प्रतिनिधित्व भी किया है। इसके अलावा कुछ दिनों पहले पार्टी के विभिन्न पदों से बर्खास्त पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्ण कैबिनेट मंत्री किशोर उपाध्याय पर भी पार्टी कोई निर्णय नहीं कर पाई है।
किशोर उपाध्याय टिहरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं, यहां से वे विधायक भी रहे हैं। लेकिन पिछले चुनाव पार्टी ने उन्हें सहसपुर से लड़वाया और वे चुनाव हार गए थे। इस बार वे टिहरी से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन पार्टी ने न तो अभी उनका सीट कंफ़र्म किया है और न ही टिहरी से उम्मीदवार घोषित की है।
इसी प्रकार दो दिन पहले हरक सिंह रावत की कांग्रेस में वापसी होने के बाद भी उनको लेकर पार्टी असमंजस में है,और हर बार अलग अलग क्षेत्र चुनने वाले हरक सिंह की नजर इस बार डोईवाला, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन सीट पर है। कांग्रेस ने भी अभी तक इन तीनों सीटों पर प्रत्याशी तय नही किये हैं। ऐसे में उनको लेकर अभी भी असमंजस बरकरार हैं कि पार्टी उन्हें चुनाव लड़ाएगी या नहीं। वरिष्ठ पत्रकार दाताराम चमोली बताते हैं, ‘कांग्रेस में हरीश रावत और प्रीतम सिंह के बीच ज्यादा से ज्यादा अपने समर्थकों को टिकट देने पर रार चल रहा है, इसलिए कई बड़े नेताओं की सीट भी पार्टी अभी तक तय नहीं कर पाई है।

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