पौड़ी गढ़वाल में आकाशीय बिजली और मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद

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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। खासकर राज्य के पहाड़ी जिलों में आफत की बारिश के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। एहतियात के तौर पर देहरादून और पौड़ी गढ़वाल जिलों में शुक्रवार, 10 जुलाई कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी शासकीय, गैर-शासकीय, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिवसीय अवकाश (छुट्टी) घोषित कर दिया गया है।

मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, देहरादून जिले में कहीं-कहीं पर मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश और तेज आकाशीय बिजली चमकने की आशंका है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिले के सभी स्कूलों को बंद रखने का सख्त आदेश जारी किया है। दूसरी ओर, पौड़ी गढ़वाल की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने भी मौसम विभाग के 'ऑरेंज अलर्ट' को देखते हुए जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी का आदेश दिया है। पौड़ी में भारी बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की भी आशंका जताई गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी और मैदानी इलाकों की नदियों का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग  पूरी तरह अलर्ट पर है। आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के सभी प्रमुख बांधों और जल विद्युत परियोजनाओं के बैराजों पर निगरानी बढ़ा दी है। सभी बैराजों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक अपने जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो (पानी का आना), आउटफ्लो (पानी का निकलना) और डिस्चार्ज से संबंधित पल-पल की जानकारी अनिवार्य रूप से राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को भेजेंगे। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मानसून के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा "यदि किसी भी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित हो, तो इसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। इस सूचना में यह भी साफ होना चाहिए कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन-किन निचले (डाउनस्ट्रीम) क्षेत्रों तक पहुंचेगा और उससे जलस्तर में कितनी वृद्धि होगी, ताकि समय रहते संवेदनशील इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा सके। प्रशासन ने आम जनता और विशेषकर नदी तटों व पहाड़ी ढलानों के समीप रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें, नदी-नालों के किनारे न जाएं और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत जिला प्रशासन या आपदा हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।