उत्तराखंड में 77 प्रतिशत बीएलए तैनात, शत-प्रतिशत नियुक्ति के लिए कड़ी निगरानी के आदेश

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उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को सचिवालय से सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

समीक्षा के दौरान पाया गया कि देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन बूथों पर मैपिंग प्रतिशत कम है, वहां के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि अप्रैल माह में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान से पहले सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूर्ण की जानी चाहिए। वर्तमान में राज्य के लगभग 77 प्रतिशत बूथों पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की तैनाती हो चुकी है। इसे शत-प्रतिशत करने के लिए जिलाधिकारियों को राजनीतिक दलों के साथ शीघ्र बैठक कर बीएलए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त सभी जिलों में बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) का गठन तत्काल सुनिश्चित करने को कहा गया है। एसआईआर हेल्पडेस्क पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और ईआरओ वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोहराया कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर शिथिलता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे।