चमोली की टिम्मरसैंण गुफा तक पहुंच होगी आसान, 2027 तक पूरा होगा सौंदर्यीकरण

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हिमालयी क्षेत्र में आस्था और प्रकृति के अनूठे संगम के प्रतीक बाबा बर्फानी का टिम्मरसैंण गुफा क्षेत्र जल्द ही नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत जिला पर्यटन विकास विभाग ने टिम्मरसैंण गुफा क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार ने 26 करोड़ 85 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।

टिम्मरसैंण गुफा चमोली जनपद के नीती गांव क्षेत्र में, भारत-चीन सीमा के समीप स्थित है। यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। वर्षों से बाबा बर्फानी यहां विराजमान हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में उनकी प्रसिद्धि तेजी से बढ़ी है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटक बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए टिम्मरसैंण पहुंच रहे हैं। पर्यटन विभाग ने वर्ष 2024 में केंद्र सरकार को गुफा क्षेत्र के समग्र विकास का प्रस्ताव भेजा था, जिसे जनवरी 2025 में स्वीकृति मिल गई। अत्यधिक बर्फबारी न होने के कारण विभाग ने इस वर्ष अवस्थापना विकास कार्य शुरू कर दिए हैं। गुफा परिसर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ शिव उद्यान विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव मिल सकेगा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत टिम्मरसैंण गुफा तक जाने वाले लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग का सुधारीकरण किया जा रहा है। बर्फ के कारण रास्ते पर फिसलन की समस्या रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए रेलिंग लगाई जा रही है। साथ ही मार्ग को आकर्षक बनाने के लिए नक्काशीदार पत्थर लगाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके। परियोजना को वर्ष 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। टिम्मरसैंण गुफा अब केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी उभर रही है। औली और आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर पर आने वाले पर्यटक भी बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां पहुंच रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक मयंक शर्मा और मृदुल ने बताया कि उन्होंने औली भ्रमण के साथ टिम्मरसैंण गुफा दर्शन का कार्यक्रम बनाया और यहां बाबा बर्फानी के दर्शन के साथ-साथ अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। पर्यटन विभाग की इस पहल से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।