श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए मिलेगा 25 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन, उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक फैसला

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार श्रमिकों के हित में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 के तहत अब श्रमिकों से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे ही काम कराया जा सकेगा। इससे अधिक काम लेने पर नियोक्ताओं को ओवरटाइम का भुगतान अलग से करना होगा। इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए पहली बार वैज्ञानिक फार्मूला लागू करने की तैयारी की गई है, जिसमें श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च को भी शामिल किया गया है। श्रम विभाग ने नियमावली का मसौदा जारी करते हुए आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। इच्छुक व्यक्ति अपनी आपत्तियां या सुझाव ई-मेल के माध्यम से विभाग को भेज सकते हैं। सरकार का उद्देश्य नियमों को अधिक पारदर्शी और श्रमिक हितैषी बनाना है। नए प्रावधानों के अनुसार किसी भी श्रमिक को सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही लगातार छह घंटे काम के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक अतिरिक्त समय तक काम करता है तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर भुगतान किया जाएगा, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

न्यूनतम मजदूरी निर्धारण में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मानकों पर तय होगी। इसमें प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी की खपत को आधार बनाया गया है। इसके अलावा एक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े का प्रावधान रखा गया है। भोजन और कपड़े पर होने वाले खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा आवास किराये के रूप में जोड़ा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ा जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। नई नियमावली में परिवार की परिभाषा को भी स्पष्ट और विस्तृत किया गया है। इसमें पति-पत्नी, 21 वर्ष तक के आश्रित बेटे, अविवाहित पुत्रियां, दिव्यांग संतान और आश्रित माता-पिता (महिला कर्मियों के मामले में सास-ससुर) को शामिल किया गया है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ पूरे परिवार तक पहुंच सके। वहीं, श्रमिकों के कौशल वर्गीकरण में भी बदलाव किया गया है। अब तक अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियां थीं, लेकिन अब एक नई ‘अत्यधिक कुशल’ श्रेणी जोड़ी गई है। इसमें विशेष दक्षता और निर्णय क्षमता वाले श्रमिकों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें उनके कौशल के अनुसार बेहतर मजदूरी और सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा और उन्हें अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सकेगा।