देहरादून। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में 27 अक्टूबर से दो दिवसीय विधानसभा सत्र शुरू होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह अंतिम विधानसभा सत्र होगा। सत्र में सरकार वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 7412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी। मंत्रिमंडल इस बजट के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुका है। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयक और विभिन्न विभागों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएगी। सत्र को लेकर विधानसभा और शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने बताया कि भराड़ीसैंण में सत्र के आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से संचालित करने और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान सदन में किन विषयों पर चर्चा होगी और कार्यवाही किस क्रम में संचालित की जाएगी, इसका निर्धारण कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में किया जाएगा। इसके लिए 24 अक्टूबर को देहरादून में बैठक बुलाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में मुख्य रूप से सदन का एजेंडा तय किया जाता है। गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। वहां कर्मचारियों की कमी के कारण भी कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कार्यमंत्रणा समिति की बैठक देहरादून में आयोजित की जा रही है। दो दिवसीय सत्र में 7412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर विशेष नजर रहेगी। अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार चालू वित्तीय वर्ष में निर्धारित बजट के अतिरिक्त आवश्यक खर्चों के लिए प्रावधान करती है। ऐसे में बजट से जुड़े प्रस्तावों पर सदन में चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सत्र के दौरान द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास संशोधन विधेयक, 2026 और उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 सहित अन्य विधेयक भी सदन में पेश किए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न विभागों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम विधानसभा सत्र होने के कारण इसकी राजनीतिक और विधायी अहमियत भी रहेगी। सीमित अवधि के इस सत्र में बजट, विधायी प्रस्तावों और विभागीय रिपोर्टों को लेकर सदन की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। अब सबकी निगाहें कार्यमंत्रणा समिति की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें सत्र के लिए विस्तृत एजेंडा निर्धारित किया जाएगा। गैरसैंण में सत्र के आयोजन के साथ एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में राजधानी से जुड़ी व्यवस्थाओं और विधानसभा संचालन को लेकर भी ध्यान केंद्रित होगा। सरकार और विधानसभा प्रशासन के सामने दो दिवसीय सत्र को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी।

