उत्तराखंड में 'आपदा सुरक्षित गांव' का सपना होगा सच: ग्राम प्रधानों को दी जाएगी आधुनिक तकनीकी शिक्षा

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उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। अब राज्य में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम करेंगे, ताकि ग्राम स्तर पर आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा सके। इस पहल के तहत सबसे पहले ग्राम प्रधानों को आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे आपात स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पांडर’ की भूमिका निभा सकें। देहरादून में आयोजित समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने विश्व बैंक सहायतित ‘यू-प्रिपेयर’ परियोजना के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। बैठक उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में हर साल भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान होता है। ऐसे में गांव स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से ग्राम प्रधानों को व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आपदा के समय तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकें और पेशेवर टीमों के पहुंचने तक स्थिति को नियंत्रित रख सकें।

बैठक में मंत्री ने लोक निर्माण विभाग को विशेष निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। खासकर पुल निर्माण में सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही जिन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया बाकी है, उसे जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। आपदा शेल्टरों के निर्माण को लेकर भी मंत्री ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन शेल्टरों के लिए स्थान का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाए। इसमें क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, संभावित आपदा जोखिम और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए जिलाधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर विस्तृत योजना तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा देहरादून स्थित यूएसडीएमए भवन में अत्याधुनिक राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सभी जिलों में स्थापित जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को आधुनिक तकनीकों से लैस कर और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संबंधित विभागों को आधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दिशा में पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों को उनकी जरूरत के अनुसार संसाधन दिए जाएंगे, ताकि आपदा के समय त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य में ‘आपदा सुरक्षित गांव’ विकसित किए जाएंगे, जो विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में सक्षम होंगे। इन गांवों में जागरूकता, प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाया जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह परियोजना राज्य की सुरक्षा और सतत विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से नजर आएं और उनका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे। साथ ही उन्होंने खुद जिलों का दौरा कर परियोजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करने की बात भी कही। यह पहल न केवल आपदा प्रबंधन की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे गांव स्तर पर आत्मनिर्भर और जागरूक समाज के निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है।