पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ धामी सरकार का बड़ा एक्शन, देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून किया लागू

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देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में 'मिथकों और अस्थिरता' के दौर को पीछे छोड़ते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लगातार पांच वर्ष का सफल कार्यकाल पूरा कर एक नया और अभूतपूर्व राजनीतिक इतिहास रच दिया है। साल 2000 में राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड की राजनीति में यह पहला मौका है, जब कोई नेता लगातार इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहा है। यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक रिकॉर्ड मात्र नहीं है, बल्कि यह देवभूमि के उस 'स्वर्णिम कालखंड' का प्रतीक है, जिसमें राज्य ने नीतिगत दृढ़ता, सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना और बुनियादी ढांचे के ऐतिहासिक विस्तार को देखा है। यूं तो विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मुख्यमंत्री धामी के इस कार्यकाल को वर्षों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा लिए गए साहसिक और युगांतकारी फैसलों के लिए याद रखा जाएगा।

पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में 'सॉफ्ट स्पोकन लेकिन हार्ड टास्कमास्टर' की छवि पेश की। उनके कुछ ऐसे बड़े निर्णय रहे, जिन्होंने उत्तराखंड को राष्ट्रीय पटल पर अग्रणी राज्यों की कतार में ला खड़ा किया। देश की आजादी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना। इस ऐतिहासिक कानून को अमलीजामा पहनाकर धामी ने देश में एक मिसाल कायम की। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले भू-माफियाओं और पेपर लीक करने वालों के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून बनाया गया, जिसमें उम्रकैद और करोड़ों रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।देवभूमि की जनसांख्यिकी को बचाने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया। साथ ही, दंगाइयों से ही सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई करने वाला 'दंगा विरोधी कानून' पास कराया। उत्तराखंड की मातृशक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया। सरकारी जमीनों और जंगलों में अवैध रूप से बने धार्मिक और व्यावसायिक अतिक्रमण के खिलाफ राज्यव्यापी 'बुलडोजर अभियान' चलाकर हजारों एकड़ सरकारी भूमि को मुक्त कराया। मुख्यमंत्री धामी ने केवल कड़े कानून ही नहीं बनाए, बल्कि राज्य की आर्थिकी को वैश्विक रफ्तार देने के लिए 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' का सफल आयोजन किया। इसके जरिए देश-विदेश से हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर न सिर्फ हस्ताक्षर हुए, बल्कि आज धरातल पर कई परियोजनाओं में तेजी से काम शुरू हो चुका है। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, सीमांत क्षेत्रों का विकास (वाइब्रेंट विलेज), और केदारनाथ-बद्रीनाथ के मास्टर प्लान के साथ-साथ 'मानसखंड मंदिर माला मिशन' के तहत कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों का कायाकल्प इस कार्यकाल की सबसे बड़ी बुनियादी उपलब्धियां हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पहले ही यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे और उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। विभिन्न हालिया राजनीतिक सर्वेक्षणों और सर्वे रिपोर्टों में भी यह बात खुलकर सामने आई है कि आज भी राज्य में भाजपा का सबसे लोकप्रिय, भरोसेमंद और सर्वस्वीकार्य चेहरा पुष्कर सिंह धामी ही हैं। आम जनता के बीच उनकी 'युवा और बेदाग' छवि पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। हालांकि, इतिहास रचने के बाद भी मुख्यमंत्री धामी के आगे की राह कांटों भरी है। आने वाले कुछ महीनों में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। लगातार दो बार सत्ता में रहने के कारण पैदा होने वाले असंतोष को दूर करना।  प्रदेश के युवाओं के लिए निजी और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के नए और पारदर्शी अवसर पैदा करना।  मानसून के दौरान उत्तराखंड में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तंत्र को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाना। शासन और प्रशासन के हर स्तर पर पारदर्शिता लाना और जनसुविधाओं का सरलीकरण करना। यदि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी कुशल रणनीति से इन चुनौतियों को पार कर लेते हैं और भाजपा को 2027 में लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक प्रचंड बहुमत दिला देते हैं, तो वह उत्तराखंड की सियासत के 'महानायक' बन जाएंगे। लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर वह एक ऐसा अटूट कीर्तिमान स्थापित करेंगे, जिसे तोड़ पाना भविष्य के किसी भी राजनेता के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि धामी का यह कार्यकाल केवल एक रिकॉर्ड था या उत्तराखंड की विकास यात्रा का सबसे निर्णायक अध्याय।