Monday, May 27, 2024

उत्तराखंड के इस जिले में है पाताल जाने का रास्ता है……

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पाताल भुवनेश्वर भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथोरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से 14 किमी दूर एक चूना पत्थर से बना हुआ प्राकृतिक मंदिर है। यह भुबनेश्वर गांव में स्थित है। मान्यताओं और लोककथाओं में कहा गया है कि इस गुफा में भगवान शिव और तैंतीस कोटि देवी देवता विराजमान हैं। प्रवेश द्वार से गुफा 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है। चूना पत्थर की चट्टान संरचनाओं ने विभिन्न रंगों और रूपों की विभिन्न शानदार स्टैलेक्टाइट की आकृतियाँ बनाई हैं। गुफा पूरी तरह से विद्युतीय रोशनी से जगमगाती है। जल के प्रवाह द्वारा निर्मित, पाताल भुवनेश्वर सिर्फ एक गुफा नहीं है, बल्कि गुफाओं के भीतर गुफाओं की एक श्रृंखला है।

उत्तराखंड के पिथोरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर एक अद्वितीय गुफा मंदिर है जिसकी कहानी बहुत प्राचीन है। यह गुफा मंदिर गहरे पहाड़ियों की गोद में स्थित है और इसे भगवान शिव के पांच प्रमुख रूपों के स्थलों में से एक माना जाता है।

कहानी के अनुसार, पाताल भुवनेश्वर की गहराईयों में पहुंचने के लिए एक लम्बी गुफा में प्रवेश करना पड़ता है। इस गुफा में आकर आपको विभिन्न संग्रहालयों की तरह विविध शिवलिंगों, गणेश, पार्वती, गौरीकुण्ड, हनुमान और बहुत सी अन्य धार्मिक मूर्तियाँ दिखाई देती हैं।

कहानी के अनुसार, पाताल भुवनेश्वर की गुफा में पहुंचने के लिए एक बार पांडवों ने इसे खोजने का प्रयास किया था, और इस दौरान उन्होंने इस गुफा के रहस्यमय और चमत्कारिक दृश्यों का सामना किया।

पाताल भुवनेश्वर की कहानी गहरी धार्मिक महत्वपूर्णता और प्राचीनता को दर्शाती है और यह भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है

जैसा की हम सब जानते ही हैं भगवान शिव ने गणेश जी के सिर की जगह एक हाथी का सिर लगा दिया था, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गणेश जी का सिर कहां गया।

उत्तराखंड के पिथोरागढ़ में गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित एक रहस्यमयी गुफा है जिसका नाम पाताल भुवनेश्वर गुफा है। इस गुफा में गणेशजी का मानव सिर मौजूद है, जिसकी रक्षा स्वयं महादेव करते हैं।

गणेशजी के कटे हुए सिर के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाली ब्रह्म कमल के आकार की एक चट्टान भी है। गणेशजी के शिला समान कटे मस्तक पर स्थित इस ब्रह्मकमल से दिव्य बूँदें टपकती रहती हैं।

कहा जाता है कि इस ब्रह्मकमल की स्थापना शिवजी ने यहां की थी। साथ ही शिवजी ने गणेशजी का सिर भी इसी गुफा में रख दिया था। इस गुफा में स्थापित गणेशजी की मूर्ति को आदि गणेश कहा जाता है। आदि शंकराचार्य ने कलिवुगा में इस गुफा की खोज की थी।

इस गुफा में बने 4 द्वारों को पाप द्वार, रण द्वार, धर्म द्वार और मोक्ष के रूप में बनाया गया है। इस गुफा का पाप द्वार रावण की मृत्यु के बाद, रण द्वार महाभारत के बाद बंद हो गया था हलाकि अब धर्म द्वार खुल चूका है

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