Monday, May 27, 2024

औरतें आखिरकार शमशान घाट क्यों नहीं जा सकती ???

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भारतीय समाज में शमशान घाट एक महत्वपूर्ण स्थल है जहाँ मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यह सामाजिक प्रथा पुरानी समय से चली आ रही है और यहाँ जाने वाले लोगों की अधिकांशतः पुरानी परंपराओं और धार्मिक आदर्शों का पालन करते हुए दिखाई देते हैं।

हिंदू धर्म में मृत्यु को एक नये जन्म का संकेत माना जाता है। इसी विचारधारा के चलते शमशान घाट पर अंतिम संस्कार करना महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ जाने का उद्देश्य आत्मा को मुक्ति दिलाना होता है, जिसके बाद वह अगले जन्म में नया जीवन आरंभ कर सके।

हालांकि, आजकल कुछ लोग शमशान घाट की परंपराओं को तोड़ने की दिशा में बदलते जा रहे हैं और उन्होंने इस परम्परा को महिलाओं के लिए रोक लगा दी है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक आदर्शों की अचानक परिवर्तन, और आधुनिकता की दिशा में बदलती मानसिकता।

शमशान घाट में महिलाओं के जाने के बारे में सामाजिक विचारधारा कई विवादों का केंद्र बन चुकी है। कुछ लोग मानते हैं कि शमशान घाट एक पवित्र स्थल होता है जहाँ महिलाएं नहीं जानी चाहिए, तो कुछ लोगों के अनुसार यह एक अत्याचार है और महिलाओं को भी इस अंतर्निहित प्रथा में भागीदारी मिलनी चाहिए।

आधुनिकता के साथ ही, महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन वे अब भी कई क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में पिछड़ी हुई हैं। ऐसे में शमशान घाट में महिलाओं के प्रवेश के बारे में सोचना और उन्हें उनके अधिकारों की ओर कदम बढ़ाना आवश्यक है।

सामाजिक बदलाव के साथ-साथ शिक्षा का प्रसार भी हो रहा है, जिससे महिलाएं भी अधिक जागरूक हो रही हैं। इससे वे अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए संघर्ष कर सकती हैं और समाज में बेहतर स्थिति हासिल करने में सक्षम हो सकती हैं।

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