Wednesday, February 8, 2023
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गोवा के राज्यपाल श्रीधरन पिल्लई से मिले केंद्रीय मंत्री डॉ. सिंह! समुद्री खनिजों की खोज में तेजी लाने के तरीकों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज शाम गोवा के राज्यपाल पी.एस. श्रीधरन पिल्लई से मुलाकात की और तटीय और समुद्री स्रोतों से समुद्री खनिजों की खोज में तेजी लाने के तरीकों पर चर्चा की और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भविष्य की कुंजी बताया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान में अग्रणी देशों में से एक बनकर उभरा है। और भविष्य की ऊर्जा और धातु की मांगों को पूरा करने के लिए जरूरी संसाधनों को समुद्र में खोज के लिए सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। उन्होंने कहा, मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘डीप ओसेन मिशन’, ‘ब्लू इकोनॉमी’ को समृद्ध करने के लिए विभिन्न संसाधनों के लिए एक और नए अवसर की शुरुआत करता है। इस अवसर पर डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओसेन रिसर्च (एनसीपीओआर) के पास विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ भारतीय रिज क्षेत्र में मल्टी-मेटल हाइड्रोथर्मल मिनरलाइजेशन के भीतर गैस हाइड्रेट की खोज करने का अधिकार है। इसके अलावा राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) गोवा में अपने मुख्यालय के साथ दो अनुसंधान जहाजों आरवी सिंधु संकल्प (56 मीटर) और आरवी सिंधु साधना (80 मीटर) का संचालन करता है जो कि बहुआयामी समुद्र विज्ञान ऑब्जर्वेशन के लिए सुविधा संपन्न है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने श्री पिल्लई को बताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में सभी विज्ञान मंत्रालय और विभाग अब एक विशेष मंत्रालय या विभाग आधारित परियोजनाओं के बजाय एकीकृत विषय आधारित परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हाल ही में भुवनेश्वर में खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी) और चेन्नई स्थित एनआईओटी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी) के बीच मजबूत समन्वय और सहयोग के लिए निर्देश जारी किए गए थे, ताकि भारत की ब्लू इकोनॉमी को विकसित करने और इसके समुद्री संसाधनों का उपयोग करने में तुरंत प्रगति हो सके। उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र में कुछ खनिज संसाधनों के प्रभावी खनन और गैस हाइड्रेट संसाधनों के दोहन के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के विकास के प्रयास जारी हैं और इसमें एनसीपीओआर प्रमुख भूमिका निभा सकता है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत की ब्लू इकोनॉमी को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के एक उप समूह के रूप में समझा जाता है, जिसमें देश के कानूनी अधिकार क्षेत्र के भीतर वाले समुद्र, समुद्री और तटवर्तीय क्षेत्रों में पूरे समुद्री संसाधन प्रणाली और मानव निर्मित आर्थिक बुनियादी ढांचा शामिल है। उन्होंने कहा, यह वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सहयोग प्रदान करता है। जिनका आर्थिक विकास, पर्यावरणीय टिकाऊपन और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ स्पष्ट संबंध हैं।

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