यूपी में टिकट की बड़ी छंटनी की तैयारी! विधायकों की रिपोर्ट कार्ड संग उम्मीदवारों का पैनल तैयार, एंटी-इंकंबेंसी से निपटने को भाजपा ने कसी कमर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी यानी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति के कील-कांटे दुरुस्त करने शुरू कर दिए हैं। आगामी चुनाव में पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता में पनप रही नाराजगी (एंटी-इंकंबेंसी) है। इस सिरदर्दी का तोड़ निकालने के लिए भाजपा न सिर्फ सभी जीती हुई सीटों पर व्यापक आंतरिक सर्वे करा रही है, बल्कि विधायकों के खिलाफ गहरी नाराजगी वाली सीटों पर नए प्रत्याशियों का पैनल भी तैयार कर रही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशी चयन की कवायद तेज कर दी है। पार्टी की रणनीति अब केवल मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन के आकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन सीटों पर विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आ रही है, वहां वैकल्पिक उम्मीदवारों का पैनल भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी का जोर ऐसे चेहरों की तलाश पर है, जिनकी स्थानीय पकड़ और चुनावी संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हों। भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर अलग-अलग स्तर पर फीडबैक और सर्वे कराए जाने की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने सभी 403 सीटों पर सर्वे की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन के साथ संभावित दावेदारों और स्थानीय मुद्दों का भी आकलन किया जा रहा था। अब पार्टी का विशेष फोकस उन सीटों पर बताया जा रहा है, जहां मौजूदा विधायकों के खिलाफ असंतोष की स्थिति सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ब्रज और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी ने अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाया है। इन क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन और पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को भी रणनीति तैयार करने के दौरान ध्यान में रखा जा रहा है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, इन क्षेत्रों की 140 से अधिक जीती हुई सीटों पर सर्वे का काम लगभग पूरा होने की स्थिति में है। इनमें करीब 80 ऐसी सीटों पर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार किए जाने की बात कही जा रही है, जहां मौजूदा विधायकों को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी का फीडबैक मिला है। इन पैनलों को तैयार करने में बूथ से लेकर ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों की राय को शामिल किए जाने की बात कही गई है। सितंबर में प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों में भी भाजपा के आंतरिक सर्वे में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी सामने आने का दावा किया गया था। हालांकि, टिकट काटने या किसी विशेष उम्मीदवार को अंतिम रूप देने का निर्णय पार्टी नेतृत्व की औपचारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा सहयोगी दलों की सीटों को भी इस प्रक्रिया से अलग नहीं रख रही है। पार्टी कथित तौर पर सहयोगी दलों के हिस्से वाली सीटों की स्थिति का भी आकलन कर रही है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर सीटों की अदला-बदली, उम्मीदवार चयन और स्थानीय समीकरणों को लेकर बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। पार्टी की योजना नवंबर मध्य तक सभी विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार करने की बताई जा रही है। इसके बाद दिसंबर में टिकट चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी है। भाजपा के सामने इस पूरी कवायद का केंद्र मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन, स्थानीय स्वीकार्यता, संगठन से समन्वय और चुनावी संभावनाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण में केवल पुराने रिकॉर्ड या पार्टी में वरिष्ठता को निर्णायक आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि संभावित जीत की क्षमता समेत कई जमीनी मानकों को महत्व दिया जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।