उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जिसने औद्योगिक इकाइयों में अग्निशमन सुरक्षा के इंतज़ामों की पोल खोलकर रख दी है। थाना शिकोहाबाद क्षेत्र के नोशेहरा उर्मुरा किरार गांव के पास स्थित पुराने टायरों से ऑयल निकालने वाली एक फैक्ट्री में अचानक विकराल आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें और काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से नज़र आने लगा, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
यूपी के फिरोजाबाद जिले में रविवार दोपहर पुराने टायरों से ऑयल निकालने वाली फैक्ट्री में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। फैक्ट्री परिसर में रखे पुराने टायरों ने आग पकड़ ली, जिससे कई किलोमीटर दूर तक धुएं के गुबार और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। भीषण आग से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ी। हादसा थाना शिकोहाबाद क्षेत्र के नोशेहरा उर्मुरा किरार गांव के पास स्थित टायर फैक्ट्री में हुआ। यहां पुराने टायरों से तार और ऑयल निकालने का काम किया जाता था। रविवार दोपहर तक फैक्ट्री में काम सामान्य रूप से चल रहा था। इसी दौरान अचानक परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने फैक्ट्री के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में पुराने टायर जमा होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। आग की ऊंची लपटों और घने धुएं को देखकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के क्षेत्र को खाली कराया, ताकि किसी तरह की जनहानि न हो। आग के विकराल रूप को देखते हुए जनपद की दमकल की गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। आग को और फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने तीन जेसीबी मशीनों की मदद ली। इनके जरिए फैक्ट्री परिसर और आसपास रखे टायरों को हटाया गया, ताकि आग की लपटें दूसरे हिस्सों तक न पहुंच सकें। हालांकि, आग इतनी भीषण थी कि करीब 60 टन पुराने टायर जलकर राख हो गए। फैक्ट्री में रखे ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग बुझाने में दमकल कर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सत्येंद्र पांडेय के मुताबिक, आग लगने की सूचना करीब ढाई बजे मिली थी। सूचना मिलते ही जनपद की सभी उपलब्ध दमकल गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में पुराने टायरों से तेल निकालने का काम किया जाता था। परिसर में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण आग बुझाने के अभियान में परेशानी आई। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि आग पूरी तरह बुझने और घटनास्थल की जांच के बाद ही इसकी वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस और संबंधित विभाग की टीमें आग से हुए नुकसान का आकलन करने के साथ ही फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों की भी जानकारी जुटा रही हैं। बड़ा सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में पुराने और ज्वलनशील टायरों के भंडारण के बावजूद परिसर में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था क्यों नहीं थी। आग की इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

